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भक्ति में डूबा जेल, सैकड़ों कैदी उपवास पर
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के जयकारे से भैरवगढ़ जेल अब गूंजने लगा है। जेल में बंद कैदी इन दिनों मां की आराधना में तल्लीन हैं। कैदियों ने जेल में कलश स्थापना तो की ही है, साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित की है, जहां अलसुबह से लेकर देर शाम लॉकअप होने तक पूजा अनुष्ठान जारी हैं। इन दिनों जेल के कैदियों की दिनचर्या के साथ उनके चरित्र में भी बड़ा परिवर्तन आया है। हर कैदी अपने पहचान के कैदियों को आपसी अभिवादन में जय माता दी कहकर जयकारा लगवा रहे हैं और वे इससे बेहद खुश भी हैं।
जेल शब्द आते ही लोग सिहर जाते हैं। यहां रहने वाले बंदियों के अपराध और उनके खूंखार चरित्र के चलते लोग उनके बारे में बात करना तक पसंद नहीं करते। ऐसे में यहां निरुद्ध बंदी यदि दिनभर तल्लीनता के साथ पूजा-पाठ करते नज़र आए तो यह जेल प्रशासन की एक बड़ी सफलता है। कोई चोरी में बंद है तो कोई डकैती में, किसी ने व्याभिचार किया तो कोई हत्या के आरोप में आजीवन काट रहा है, लेकिन इन बंदियों को नवरात्र में जेल के अंदर गहरी साधना में जब आप देखेंगे तो अहसास होगा कि वास्तव में अपराध अक्सर भावावेश में भी हो जाता होगा, जिनका प्रायश्चित ये इस तरह कर रहे हैं।
६५० बंदी ने रखा है नौ दिनों का उपवास- चौकाने वाली बात तो यह है कि इस जेल में १५०० आजीवन सजा काट रहे बंदियों में से ज्यादातर ने उपवास रखा है। यही नहीं जेल में निरुद्ध बंदियों की संख्या तो २००० से भी अधिक है, इनमें दूसरे धर्म के बंदी भी शामिल हैं। इन बंदियों में से करीब ६५० बंदियों ने उपवास रखा है। ये बंदी उपवास के दौरान जेल में बिल्कुल साधु के चरित्र का अनुसरण कर रहे हैं जिससे जेल प्रशासन भी खुश है।